
Bangladesh में चुनावी नतीजों ने सियासी परिदृश्य बदल दिया है। राजधानी ढाका से लेकर सीमावर्ती गांवों तक चर्चा सिर्फ एक है — सत्ता परिवर्तन। वर्षों बाद ऐसा जनादेश आया है जिसने established political order को चुनौती दी है।
Ballot box ने साफ संकेत दिया है — जनता इस बार बदलाव चाहती थी।
BNP की दमदार वापसी
Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने संसदीय चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 200 का आंकड़ा पार कर लिया है और करीब 208 सीटों पर बढ़त की खबरें हैं। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि राजनीतिक comeback story मानी जा रही है। वहीं Jamaat-e-Islami गठबंधन लगभग 68 सीटों के आसपास सिमटता दिख रहा है।
Political observers इसे “trust reset election” बता रहे हैं।
36 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री?
इस जीत के साथ ही तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना प्रबल हो गई है। अगर ऐसा होता है तो 36 वर्षों में पहली बार Bangladesh को पुरुष प्रधानमंत्री मिलेगा।
अब तक देश की राजनीति दो मजबूत महिला नेताओं — खालिदा जिया और शेख हसीना — के इर्द-गिर्द घूमती रही। History may be preparing for a symbolic shift.
संसद का गणित
Bangladesh Parliament में कुल 350 सदस्य होते हैं 300 सीधे चुने हुए और 50 महिलाएं आरक्षित श्रेणी से। कार्यकाल पांच साल का होता है।
अब नजर इस बात पर है कि नई सरकार policy continuity रखेगी या policy reset करेगी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
Bangladesh सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं है। भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,000 किमी लंबी सीमा है जो भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। ऐसे में ढाका की सत्ता में बदलाव का असर सीधे भारत की security calculus पर पड़ता है।

सीमा सुरक्षा और घुसपैठ का सवाल
Border fencing अभी भी कई हिस्सों में अधूरी है। Illegal infiltration, cattle smuggling, narcotics trade और fake currency जैसी चुनौतियां पहले से मौजूद हैं। अगर नई सरकार का रुख सख्त हुआ तो सहयोग बढ़ेगा। अगर राजनीतिक अस्थिरता आई तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।
कट्टरपंथ और ISI की गतिविधियां
हाल के वर्षों में कुछ कट्टरपंथी तत्वों की रिहाई और बाहरी एजेंसियों की सक्रियता चिंता का विषय रही है। भारत चाहेगा कि नई सरकार counter-terrorism cooperation को मजबूत रखे, जैसा कि शेख हसीना के कार्यकाल में देखा गया था। Security cooperation is non-negotiable for New Delhi.
एक्ट ईस्ट पॉलिसी पर असर
India’s Act East Policy के लिए Bangladesh एक रणनीतिक gateway है। Energy trade, connectivity corridors और power grid cooperation पिछले दशक में मजबूत हुए हैं। Political instability इन प्रोजेक्ट्स की गति धीमी कर सकती है।
Stable Dhaka means predictable partnership.
BNP और जमात: बदली हुई समीकरण
दिलचस्प बात यह है कि BNP और Jamaat अब सहयोगी से ज्यादा प्रतिस्पर्धी नजर आते हैं। India के लिए उम्मीद की बात यह है कि चाहे जो भी सत्ता में आए, bilateral engagement का चैनल खुला रहे। Foreign policy में permanence होती है, personalities बदलती रहती हैं।
Bangladesh की नई सरकार का आधिकारिक गठन कुछ ही समय में साफ हो जाएगा। लेकिन यह चुनाव सिर्फ ढाका का internal shift नहीं है यह South Asia के strategic balance का भी संकेतक है। Delhi की नजर अब सिर्फ नतीजों पर नहीं, policies पर है।
नंगे पांव संगम तक बेटा, प्रयागराज में अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन
